M.A.English+B.ed अतिथि शिक्षक सीताराम को शिवराज ने किया आत्मनिर्भर , मोदी के पकोड़े बेचने को मजबूर

भोपाल। 12 साल से मप्र के सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षक इस वक्त सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। 6 महीने से इन्हें मामूली सा मिलने वाला वेतन नहीं मिला है, सरकार ने अब तक इन्हें स्कूल आने के लिए भी नहीं कहा है, जिस कारण 70 हजार अतिथि शिक्षक दुविधा की स्थिति में हैं। बुरी तरह आर्थिक संकट में फंस चुके अतिथि शिक्षक जिंदा रहने के लिए मेहनत मजदूरी करने को मजबूर हैं। मनरेगा में मिट्टी खोदने, सब्जियां बेचने जैसी खबरें बड़ी संख्या में आईं, अब मंदसौर से सीताराम प्रजापति के बारे में जानकारी मिली है कि उन्होंने परिवार का पेट पालने के लिए जलेबी एवं पकोड़े का ठेला लगा लिया है। सीताराम प्रजापति इंग्लिश से एमए एवं बीएड हैं और वे शासकीय हायर सैकेंडरी स्कूल चचावदा पठारी, मंदसौर में 12 साल से अतिथि शिक्षक की नौकरी कर रहे हैं। सीताराम प्रजापति की तस्वीर वायरल होने के बाद अतिथि शिक्षकों ने मप्र सरकार को लानत भेजनी शुरू कर दी है। मोदीजी के पकोड़े वाले वयान पर कटाक्ष हो रहे हैं।


क्यों आई ऐसी नौबत
सीताराम प्रजापति जैसे अतिथि शिक्षकों के मजदूरी करने जैसी नौबत मप्र सरकार की अनदेखी के कारण आई है, जिसने अतिथि शिक्षकों को 6 महीने से वेतन नहीं दिया है। वैश्विक महामारी के कारण लगे लोकडाऊन के दौरान अतिथि शिक्षकों के पास जो थोड़ा बहुत था, वह खर्च हो गया और इधर-उधर से उधारी लेकर काम चलाया, अब जब लोकडाऊन खुलना शुरू हो गया है, तब उनके सामने दो वक्त की रोटी का सवाल मुंह वाए खड़ा है। सरकार यदि इन्हें 6 महीने का वेतन दे देती, तब शायद सीताराम जैसे अतिथि पकोड़े बेचने या मजदूरी करने को मजबूर नहीं हुए होते। शिक्षण सत्र शुरू होने पर अतिथि शिक्षकों को स्कूलों में बुला लिया जाता था, लेकिन स्कूल नहीं खुलने से यह खाली बैठे हैं यानि अभी इनके पास नौकरी भी नहीं है और सरकार भी इनकी चिंता नहीं कर रही है, जिस कारण इस वक्त मप्र का अतिथि शिक्षक सबसे मुश्किल वक्त का सामना कर रहा है।

कई अतिथि आर्थिक तंगी से कर चुके हैं आत्महत्या
प्रदेश के अतिथि शिक्षकों के परिवार आर्थिक तंगी में बुरी तरह फंस चुके हैं, जहां से बाहर निकलने का रास्ता नहीं सूझने के कारण तनाव में पहुंचकर प्रदेश में दर्जनों अतिथि शिक्षक आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठा चुके हैं। अतिथि शिक्षकों के बारे में मप्र सरकार की चुप्पी भी उन्हें मानसिक तनाव दे रही है। 6 महीने का रुका हुआ वेतन एवं स्कूलों में बुलाने जैसी छोटी सी मांग के लिए प्रदेश के अतिथि शिक्षक लगातार आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन इन आंदोलनों का असर भी सरकार पर नहीं पड़ा है, इसीलिए उसने अब तक इन अतिथियों के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है। अतिथि शिक्षकों की बढ़ती नाराजगी के कारण वेतन के लिए बजट आवंटित हुआ भी, तो न के बराबर था।

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